#सोलंकी_चालुक्या_राजपूत
जय श्री राम मनीषा सिंह की कलम से भारत के धर्मयुद्ध में केवल पुरुषों ने ही अपने जीवन का बलिदान नहीं किया बल्कि यहाँ की वीरांगनाएँ भी घर से निकलकर साहस के साथ युद्ध-भूमि में शत्रुओं से लोहा लिया। उन वीरांगनाओं में अग्रणी थीं लीलादेवी चौहान ।
जालोर राज्य का चौहान राज्यवंश का राजा समर सिंह (Samarasimha) की पुत्री लीलादेवी चौहान से अन्हिलवाड़ा (वर्त्तमान गुजरात) नरेश भीमदेव सोलंकी का विवाह हुआ इस बात का उल्लेख Kadi inscription भीमदेव सोलंकी एवं लीलादेवी कि विवाह का उललेख हैं ।
लीलादेवी चौहान बचपन से युद्धकला में अत्यधिक रूचि रखती थी और १२वि से १३वि सताब्दी (13th century) यह समय भी ऐसा था जब रणरागिनी बनकर हरदम धर्म एवं अपनी खुद शील रक्षा के लिए तैयार रहना पड़ता था यह कोई आश्चर्यजनक जानकारी नही होगी जब भारत में अरब के मलेच्छों का आक्रमण बढ़ गया भारतवर्ष में इन अरबी अश्शूरों का प्रथम लक्ष्य होता था सुन्दर सुन्दर रानियो का हरण करना पर भारतवर्ष माँ सीता की भूमि हैं यहाँ कोई रावन किसी सीता को अपवित्र करने से पहले ही काल को बली चढ़ जाता था ।
लीलादेवी चौहान एक अत्यंत पराक्रमी क्षत्राणी थी कब कौनसी परिस्तिथि से सामना होजये इसलिए हमेशा अपने साथ एवं अपनी सवारी पालकी में भी शस्त्र रखती थी ।
Battle of Anahilapataka or Nahrwala नाहरवाला की युद्ध -:
तारीख- ए- फिरीश्ता एवं मुस्लिम इतिहासकार हसन निजामी ने इस युद्ध का वर्णन अपने पुस्तक में किया हैं Battle of Anahilapataka or Nahrwala नाहरवाला की युद्ध सन ४ फरवरी ११९७ ईस्वी कुतुबुद्दीन ऐबक भाड़ी संख्या की सेना के साथ नाहरवाल से होते हुए चालुक्या साम्राज्य की राजधानी अनाहीलापताका पर आक्रमण किया भीमदेव की सेना पर्याप्त नही थे कुतुबुद्दीन ऐबक की सेना लाखों की संख्या थी । चालुक्या साम्राज्य का सेनापति था राव करण , वाल्लन एवं धरावर्षा था जिनकी शौर्य एवं पराक्रम की ख्याति दिल्ली के मलेच्छ अश्शूरों का नींद हरम कर चुके थे।
भीमदेव सोलंकी की सेना ७०,००० (70,000) से अधिक नहीं था (The 13th century Muslim historian Hasan Nizami boasts that the Chaulukyas lost 50,000 men in this battle. ) एवं ऐबक की सेना इस हिसाब से चौगुनी थी भीमदेव सोलंकी की हार होती हैं इस युद्ध में ऐबक ने महाराज भीमदेव के सेनापतिओं को बंदी बना कर मार देते हैं एवं भीमदेव सोलंकी की ३५,००० सैनिक रणभूमि में वीरगति को प्राप्त होते हैं एवं २०,००० सैनिको को बंदी बना लिया जाता हैं (The 16th century chronicler Firishta gives the numbers as 35,000 killed and 20,000 captured) ऐबक महाराज भीमदेव की प्राण दान के बदले राजकोष की धन संपत्ति ऐबक लूटकर ले जाता हैं अनाहलियापताका (Anahliapataka) राज्य में महाराज भीमदेव को नज़रबंद करने के लिए उनके दरबार में अपने सिपहासलाकर को छोड़ दिया जिससे महाराज भीमदेव दोबारा ऐबक के खिलाफ युद्ध घोषणा ना कर पाए ।
ऐबक अपनी सेना के साथ अनाहलियापताका (Anahliapataka) राज्य के अन्दर प्रवेश कर लूटमार किया एवं लूटने के बाद मंदिरों को लूटा एवं सोने की मुर्तिओं को लूटकर ले गया ।
अनाहलियापताका (Anahliapataka) राज्य की गद्दी पर भले ही महाराज भीमदेव बैठते थे परन्तु शसन ऐबक का चलता था महाराज भीमदेव को घुटन महसूस हो रही थी रानी लीलादेवी ने योजना बनाया की ऐबक के सिपहासलाकर भीमदेव को नज़रबंद किया था उनके परिवार को नही इस बात का लाभ उठाते हुए महारानी लीलादेवी ने महाराज भीमदेव के सेनापति लावण्य प्रसाद एवं श्रीधर को सूचित किया अनाहलियापताका (Anahliapataka) राज्य से दूर किसी गुप्त जगह पर ऐबक के विरुद्ध युद्ध की योजनायें बनायी गयी राष्ट्र , धर्म पर छाये पराधीनता के काले बादल को छांट कर स्वाधीनता का सूर्योदय होने का समय आगया था। (There are some references to Under the leadership of Queen Liladevi , Bhima's generals Lavanaprasada and Shridhara having achieved military successes against the Ghurids (called "Turushka" and "Hammira"). It is known that Bhima was in control of Anahilapataka by 1201 CE.)
महारानी लीलादेवी ३०,००० (30,000) की सेना लिए सेनापति लावण्य प्रसाद एवं श्रीधर के साथ एक गुप्त सुरंग से होते हुए (अब कीचड़ और पत्थरों से अवरुद्ध) पाटन से अनाहलियापताका राज्य में प्रवेश किया एवं महाराज भीमदेव अपने दरबार में उपस्थित सैन्यबल को इस युद्ध के लिए आगम सुचना दे चुके थे इसलिए दरबार एवं राज्य में उपस्थित सभी सैनिक सजग थे ।
महारानी लीलादेवी ने दरबार में उपस्थित ऐबक के दूत के हाथों युद्ध घोषणा पत्र भेज दिया । सन १२०१ ईस्वी में ऐबक अपनी सेना के साथ फिर से आक्रमण किया अनाहीलापताका राज्य पर भिमदेव सोलंकी स्वयं १५,००० से १६,००० सैनिको का नेतृत्व कर रहे थे , लावण्या प्रसाद के साथ १०,००० से १२,००० अश्व सैन्य दल था एवं श्रीधर महारानी लीलादेवी के साथ २०,००० सैनिको का नेतृत्व कर रहे थे ।
ऐबक की ९५,००० से एक लाख की (95,000 - 1,000,00) विशाल सेना थी चालुक्या साम्राज्य की सैन्यबल तनिक चिंतित लगे डर नही चिंतित थे क्योंकि इस बार हारने का अर्थ राज्य , स्त्री , धन , मदिर , संस्कृत सब मिट जायेगा तभी महारानी लीलादेवी ने हुँकार भड़ी “वीरो धर्म एवं भगवा ध्वज की रक्षा हेतु तैयार हो जाओ । धर्म रक्षार्थ के लिए रिपु दल की सेना को परास्त कर शुद्धि यज्ञ करवाना हैं , संसार तुम्हारा यशोगान करेगा। मेरे प्राण रहते एक पग पीछे नहीं हटाऊंगी । प्रतिज्ञा करती हूँ कि अन्तिम श्वास तक भारत भूमि की रक्षा करूंगी । रणरागिनी की इस हुँकार से वीरता की लहर दौड़ गई धर्म योद्धाओ ने प्रण किया “जब तक हमारे धर पर सर रहेगा मलेच्छों का धर सर विहीन होता रहेगा”
कुतुबुद्दीन ऐबक ने फरमान भेजा की रानी को उनके हवाले कर दे एवं आत्मसमर्पण कर ले इतनी विशाल सेना से युद्ध करने से कुछ हासिल नहीं होगा चालुक्या साम्राज्य का ध्वंश निश्चित हैं परन्तु भीमदेव सोलंकी ने फल की चिंता ना करते हुए युद्ध घोषणा किया ।
रानी लीलादेवी ने अपने सेनापति श्रीधर के साथ योजना बनायीं युद्ध का परिणाम कुछ भी हो परन्तु कुतुबुद्दीन ऐबक की सेना को राज्य की सीमा से बहार खदेड़ना हैं जिससे राज्य की स्त्रियाँ अपनी शील रक्षा हेतु राज्य छोड़ किसी सुरक्षित स्थान पर आश्रय ले सके ।
ऐबक का सेनापति आमिर अताबेग ने ६२,००० सेना (62,000) के साथ हमला किया रानी की सेना को परास्त कर रानी माँ को जीवित पकड़कर ऐबक की हरम में पेश करना चाहते थे रानी लीलादेवी की तलवार का गति हवाओं को काट रही थी सेनापति बेग की सेना उलटे पांव भागना उचित समझा रानी लीलादेवी के हाथो सेनापति आमिर अताबेग की मृत्यु हुआ एवं आमिर अताबेग का सेना उलटे पांव भागा
ऐबक की सेनापति फखरुद्दीन (Fakhr ad-Din) ने रानी लीलादेवी को घेड़ लिया रानी लीलादेवी रणरागिनी बन फखरुद्दीन के सेना को गाजर मुली की भांति काटना आरंभ किया यह देख भयभीत होकर फखरुद्दीन ऐबक के पास भागा कहा रानी को ख़तम नहीं किया तो हम जंग हार जायेंगे ऐबक ने योजना बनाया रानी को जान से नही मारना मूर्छित कर राज्य से बहार लेकर जाना हैं सही सलामत फखरुद्दीन ने रानी लीलादेवी को फिर से घेड़ा फखरुद्दीन ने जैसे ही प्रहार किया रानी पर रानी ने अपनी तलवार से प्रहार को रोकते हुए फखरुद्दीन को बीचो बीच से चिड़कर रख दिया ।
दो दो सेनापति की मृत्यु से ऐबक की सेना मनोबल टूट चूका था भीमदेव की सेना अत्याल्प था परन्तु ऐबक की जहा सौ मर रहे थे भीमदेव का एक सैनिक वीरगति को प्राप्त कर कर रहे थे ऐबक अपनी सेना को एक किया एवं इस्लाम की तालीम को याद करवाया एवं नयी जोश भड़ते हुए अपने बिखरे सेना को एक कर फिर आक्रमण किया राजा भीमदेव सोलंकी एवं उनके सेनापति लावण्या प्रसाद ने ऐबक को परास्त कर उस मलेच्छ को २०० कोड़े मारे एवं नाख़ून निकाल लिया क्योंकि मंदिर ध्वस्त कर मंदिर को अपवित्र किया था एवं अनाहीलापताका राज्य के लुटे हुए धन संपत्ति वापस लिया एवं ३,००० हरज़ाना वसूला गया एवं मलेच्छों की सेना को पाटन (वर्त्तमान गुजरात) सीमा से बहार खदेड़ा ।
अंतत: अनाहीलापताका पर पुनः सोलंकी राजपूतो का राज स्थापित हुआ यह सत्य हैं नारी हिन्दू धर्म की उत्थान एवं पतन की कारन रही हैं आज हमारे पाठ्यक्रम में इन वीरांगनाओ की इतिहास लिखी नही जाती राम , रहीम एक हैं की चक्कर में हिन्दू की बेटी रहीम के साथ भाग रही हैं । घर पर एकता कपूर का सीरियल और भांड शाहरुख़ खान और दुसरे खानों का कार्यक्रम चलता हैं माँ बेटी से कहती हैं बेटी दामाद हो तो ऐसा चिकना बेटी के मन में किसी खान की रखैल बनने का ख्वाब जाग जाता हैं फिर क्या सैफीना , संगीता बिजलानी , अमृता सिंह , किरण राव बन जाती हैं ।
काश!! आजकल की नारियाँ जान जाती कितनी वीरांगनाओ ने मलेच्छों का सर उतारा था कितनी वीरांगनाओ ने अग्निदेव को खुद का तन समर्पित कर दिया तो जौहर कर आज सती माता सीता , द्रौपदी एवं पद्मिनी की धरती पर कोई युवती लव जिहाद का शिकार नहीं बनती ।
वैलेंटाइन दिवस के दिन कुछ भाई लवर्स पार्क में जाकर प्रेमी जोड़े को मारते हैं तो कुछ ज़बरदस्ती video बनाते हैं पर क्या इससे समस्याओं का समाधान हो जाता हैं मेरे ख्याल से नही समस्या और बढ़ जाती हैं हिन्दू धर्म के प्रति उनके मन में गृहणा उत्पन्ना होती हैं।
अब मुझसे पूछा जायेगा तो इसका समाधान क्या हैं इसका समाधान हैं गुरुकुल निर्माण अंग्रेजो का लागू किया हुआ Indian Education System को जड़ से उखाड़ कर फ़ेंक देना चाहिए एवं गुरुकुल लागू करनी चहिये जहाँ भारतीय होने पर गर्व महसूस करवाया जाए एवं भारत की समृद्धि एवं उपलब्धियों के विषयों में पढाया जाए ऐसे रुकेगी लव जिहाद एवं पश्चिमीकरण ।
संदर्भ-:
१) James Tod, had written a book "Early history of Solankis”
२) Rajput Kingdom of Western Asia Volume IV Rajendra Mishra
३) तारीख- ए- फिरीश्ता
मनीषा सिंह
जय श्री राम मनीषा सिंह की कलम से भारत के धर्मयुद्ध में केवल पुरुषों ने ही अपने जीवन का बलिदान नहीं किया बल्कि यहाँ की वीरांगनाएँ भी घर से निकलकर साहस के साथ युद्ध-भूमि में शत्रुओं से लोहा लिया। उन वीरांगनाओं में अग्रणी थीं लीलादेवी चौहान ।
जालोर राज्य का चौहान राज्यवंश का राजा समर सिंह (Samarasimha) की पुत्री लीलादेवी चौहान से अन्हिलवाड़ा (वर्त्तमान गुजरात) नरेश भीमदेव सोलंकी का विवाह हुआ इस बात का उल्लेख Kadi inscription भीमदेव सोलंकी एवं लीलादेवी कि विवाह का उललेख हैं ।
लीलादेवी चौहान बचपन से युद्धकला में अत्यधिक रूचि रखती थी और १२वि से १३वि सताब्दी (13th century) यह समय भी ऐसा था जब रणरागिनी बनकर हरदम धर्म एवं अपनी खुद शील रक्षा के लिए तैयार रहना पड़ता था यह कोई आश्चर्यजनक जानकारी नही होगी जब भारत में अरब के मलेच्छों का आक्रमण बढ़ गया भारतवर्ष में इन अरबी अश्शूरों का प्रथम लक्ष्य होता था सुन्दर सुन्दर रानियो का हरण करना पर भारतवर्ष माँ सीता की भूमि हैं यहाँ कोई रावन किसी सीता को अपवित्र करने से पहले ही काल को बली चढ़ जाता था ।
लीलादेवी चौहान एक अत्यंत पराक्रमी क्षत्राणी थी कब कौनसी परिस्तिथि से सामना होजये इसलिए हमेशा अपने साथ एवं अपनी सवारी पालकी में भी शस्त्र रखती थी ।
Battle of Anahilapataka or Nahrwala नाहरवाला की युद्ध -:
तारीख- ए- फिरीश्ता एवं मुस्लिम इतिहासकार हसन निजामी ने इस युद्ध का वर्णन अपने पुस्तक में किया हैं Battle of Anahilapataka or Nahrwala नाहरवाला की युद्ध सन ४ फरवरी ११९७ ईस्वी कुतुबुद्दीन ऐबक भाड़ी संख्या की सेना के साथ नाहरवाल से होते हुए चालुक्या साम्राज्य की राजधानी अनाहीलापताका पर आक्रमण किया भीमदेव की सेना पर्याप्त नही थे कुतुबुद्दीन ऐबक की सेना लाखों की संख्या थी । चालुक्या साम्राज्य का सेनापति था राव करण , वाल्लन एवं धरावर्षा था जिनकी शौर्य एवं पराक्रम की ख्याति दिल्ली के मलेच्छ अश्शूरों का नींद हरम कर चुके थे।
भीमदेव सोलंकी की सेना ७०,००० (70,000) से अधिक नहीं था (The 13th century Muslim historian Hasan Nizami boasts that the Chaulukyas lost 50,000 men in this battle. ) एवं ऐबक की सेना इस हिसाब से चौगुनी थी भीमदेव सोलंकी की हार होती हैं इस युद्ध में ऐबक ने महाराज भीमदेव के सेनापतिओं को बंदी बना कर मार देते हैं एवं भीमदेव सोलंकी की ३५,००० सैनिक रणभूमि में वीरगति को प्राप्त होते हैं एवं २०,००० सैनिको को बंदी बना लिया जाता हैं (The 16th century chronicler Firishta gives the numbers as 35,000 killed and 20,000 captured) ऐबक महाराज भीमदेव की प्राण दान के बदले राजकोष की धन संपत्ति ऐबक लूटकर ले जाता हैं अनाहलियापताका (Anahliapataka) राज्य में महाराज भीमदेव को नज़रबंद करने के लिए उनके दरबार में अपने सिपहासलाकर को छोड़ दिया जिससे महाराज भीमदेव दोबारा ऐबक के खिलाफ युद्ध घोषणा ना कर पाए ।
ऐबक अपनी सेना के साथ अनाहलियापताका (Anahliapataka) राज्य के अन्दर प्रवेश कर लूटमार किया एवं लूटने के बाद मंदिरों को लूटा एवं सोने की मुर्तिओं को लूटकर ले गया ।
अनाहलियापताका (Anahliapataka) राज्य की गद्दी पर भले ही महाराज भीमदेव बैठते थे परन्तु शसन ऐबक का चलता था महाराज भीमदेव को घुटन महसूस हो रही थी रानी लीलादेवी ने योजना बनाया की ऐबक के सिपहासलाकर भीमदेव को नज़रबंद किया था उनके परिवार को नही इस बात का लाभ उठाते हुए महारानी लीलादेवी ने महाराज भीमदेव के सेनापति लावण्य प्रसाद एवं श्रीधर को सूचित किया अनाहलियापताका (Anahliapataka) राज्य से दूर किसी गुप्त जगह पर ऐबक के विरुद्ध युद्ध की योजनायें बनायी गयी राष्ट्र , धर्म पर छाये पराधीनता के काले बादल को छांट कर स्वाधीनता का सूर्योदय होने का समय आगया था। (There are some references to Under the leadership of Queen Liladevi , Bhima's generals Lavanaprasada and Shridhara having achieved military successes against the Ghurids (called "Turushka" and "Hammira"). It is known that Bhima was in control of Anahilapataka by 1201 CE.)
महारानी लीलादेवी ३०,००० (30,000) की सेना लिए सेनापति लावण्य प्रसाद एवं श्रीधर के साथ एक गुप्त सुरंग से होते हुए (अब कीचड़ और पत्थरों से अवरुद्ध) पाटन से अनाहलियापताका राज्य में प्रवेश किया एवं महाराज भीमदेव अपने दरबार में उपस्थित सैन्यबल को इस युद्ध के लिए आगम सुचना दे चुके थे इसलिए दरबार एवं राज्य में उपस्थित सभी सैनिक सजग थे ।
महारानी लीलादेवी ने दरबार में उपस्थित ऐबक के दूत के हाथों युद्ध घोषणा पत्र भेज दिया । सन १२०१ ईस्वी में ऐबक अपनी सेना के साथ फिर से आक्रमण किया अनाहीलापताका राज्य पर भिमदेव सोलंकी स्वयं १५,००० से १६,००० सैनिको का नेतृत्व कर रहे थे , लावण्या प्रसाद के साथ १०,००० से १२,००० अश्व सैन्य दल था एवं श्रीधर महारानी लीलादेवी के साथ २०,००० सैनिको का नेतृत्व कर रहे थे ।
ऐबक की ९५,००० से एक लाख की (95,000 - 1,000,00) विशाल सेना थी चालुक्या साम्राज्य की सैन्यबल तनिक चिंतित लगे डर नही चिंतित थे क्योंकि इस बार हारने का अर्थ राज्य , स्त्री , धन , मदिर , संस्कृत सब मिट जायेगा तभी महारानी लीलादेवी ने हुँकार भड़ी “वीरो धर्म एवं भगवा ध्वज की रक्षा हेतु तैयार हो जाओ । धर्म रक्षार्थ के लिए रिपु दल की सेना को परास्त कर शुद्धि यज्ञ करवाना हैं , संसार तुम्हारा यशोगान करेगा। मेरे प्राण रहते एक पग पीछे नहीं हटाऊंगी । प्रतिज्ञा करती हूँ कि अन्तिम श्वास तक भारत भूमि की रक्षा करूंगी । रणरागिनी की इस हुँकार से वीरता की लहर दौड़ गई धर्म योद्धाओ ने प्रण किया “जब तक हमारे धर पर सर रहेगा मलेच्छों का धर सर विहीन होता रहेगा”
कुतुबुद्दीन ऐबक ने फरमान भेजा की रानी को उनके हवाले कर दे एवं आत्मसमर्पण कर ले इतनी विशाल सेना से युद्ध करने से कुछ हासिल नहीं होगा चालुक्या साम्राज्य का ध्वंश निश्चित हैं परन्तु भीमदेव सोलंकी ने फल की चिंता ना करते हुए युद्ध घोषणा किया ।
रानी लीलादेवी ने अपने सेनापति श्रीधर के साथ योजना बनायीं युद्ध का परिणाम कुछ भी हो परन्तु कुतुबुद्दीन ऐबक की सेना को राज्य की सीमा से बहार खदेड़ना हैं जिससे राज्य की स्त्रियाँ अपनी शील रक्षा हेतु राज्य छोड़ किसी सुरक्षित स्थान पर आश्रय ले सके ।
ऐबक का सेनापति आमिर अताबेग ने ६२,००० सेना (62,000) के साथ हमला किया रानी की सेना को परास्त कर रानी माँ को जीवित पकड़कर ऐबक की हरम में पेश करना चाहते थे रानी लीलादेवी की तलवार का गति हवाओं को काट रही थी सेनापति बेग की सेना उलटे पांव भागना उचित समझा रानी लीलादेवी के हाथो सेनापति आमिर अताबेग की मृत्यु हुआ एवं आमिर अताबेग का सेना उलटे पांव भागा
ऐबक की सेनापति फखरुद्दीन (Fakhr ad-Din) ने रानी लीलादेवी को घेड़ लिया रानी लीलादेवी रणरागिनी बन फखरुद्दीन के सेना को गाजर मुली की भांति काटना आरंभ किया यह देख भयभीत होकर फखरुद्दीन ऐबक के पास भागा कहा रानी को ख़तम नहीं किया तो हम जंग हार जायेंगे ऐबक ने योजना बनाया रानी को जान से नही मारना मूर्छित कर राज्य से बहार लेकर जाना हैं सही सलामत फखरुद्दीन ने रानी लीलादेवी को फिर से घेड़ा फखरुद्दीन ने जैसे ही प्रहार किया रानी पर रानी ने अपनी तलवार से प्रहार को रोकते हुए फखरुद्दीन को बीचो बीच से चिड़कर रख दिया ।
दो दो सेनापति की मृत्यु से ऐबक की सेना मनोबल टूट चूका था भीमदेव की सेना अत्याल्प था परन्तु ऐबक की जहा सौ मर रहे थे भीमदेव का एक सैनिक वीरगति को प्राप्त कर कर रहे थे ऐबक अपनी सेना को एक किया एवं इस्लाम की तालीम को याद करवाया एवं नयी जोश भड़ते हुए अपने बिखरे सेना को एक कर फिर आक्रमण किया राजा भीमदेव सोलंकी एवं उनके सेनापति लावण्या प्रसाद ने ऐबक को परास्त कर उस मलेच्छ को २०० कोड़े मारे एवं नाख़ून निकाल लिया क्योंकि मंदिर ध्वस्त कर मंदिर को अपवित्र किया था एवं अनाहीलापताका राज्य के लुटे हुए धन संपत्ति वापस लिया एवं ३,००० हरज़ाना वसूला गया एवं मलेच्छों की सेना को पाटन (वर्त्तमान गुजरात) सीमा से बहार खदेड़ा ।
अंतत: अनाहीलापताका पर पुनः सोलंकी राजपूतो का राज स्थापित हुआ यह सत्य हैं नारी हिन्दू धर्म की उत्थान एवं पतन की कारन रही हैं आज हमारे पाठ्यक्रम में इन वीरांगनाओ की इतिहास लिखी नही जाती राम , रहीम एक हैं की चक्कर में हिन्दू की बेटी रहीम के साथ भाग रही हैं । घर पर एकता कपूर का सीरियल और भांड शाहरुख़ खान और दुसरे खानों का कार्यक्रम चलता हैं माँ बेटी से कहती हैं बेटी दामाद हो तो ऐसा चिकना बेटी के मन में किसी खान की रखैल बनने का ख्वाब जाग जाता हैं फिर क्या सैफीना , संगीता बिजलानी , अमृता सिंह , किरण राव बन जाती हैं ।
काश!! आजकल की नारियाँ जान जाती कितनी वीरांगनाओ ने मलेच्छों का सर उतारा था कितनी वीरांगनाओ ने अग्निदेव को खुद का तन समर्पित कर दिया तो जौहर कर आज सती माता सीता , द्रौपदी एवं पद्मिनी की धरती पर कोई युवती लव जिहाद का शिकार नहीं बनती ।
वैलेंटाइन दिवस के दिन कुछ भाई लवर्स पार्क में जाकर प्रेमी जोड़े को मारते हैं तो कुछ ज़बरदस्ती video बनाते हैं पर क्या इससे समस्याओं का समाधान हो जाता हैं मेरे ख्याल से नही समस्या और बढ़ जाती हैं हिन्दू धर्म के प्रति उनके मन में गृहणा उत्पन्ना होती हैं।
अब मुझसे पूछा जायेगा तो इसका समाधान क्या हैं इसका समाधान हैं गुरुकुल निर्माण अंग्रेजो का लागू किया हुआ Indian Education System को जड़ से उखाड़ कर फ़ेंक देना चाहिए एवं गुरुकुल लागू करनी चहिये जहाँ भारतीय होने पर गर्व महसूस करवाया जाए एवं भारत की समृद्धि एवं उपलब्धियों के विषयों में पढाया जाए ऐसे रुकेगी लव जिहाद एवं पश्चिमीकरण ।
संदर्भ-:
१) James Tod, had written a book "Early history of Solankis”
२) Rajput Kingdom of Western Asia Volume IV Rajendra Mishra
३) तारीख- ए- फिरीश्ता
मनीषा सिंह
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